\n क्लिनिकल डिप्रेशन मेडिकल समीक्षा के साथ बहुत से लोग एक ऐसे दौर से गुज़रते है, जब वो दुखी महसूस करते हैं। लेकिन जब आप उदास होते हैं तो कुछ दिनों की बजाय लगातार कुछ हफ्तों या महीनों तक उदास महसूस करते हैं। कुछ लोग सोचते है कि अवसाद मामूली सी परेशानी है, वास्तविक स्वास्थ्य स्थित नहीं है। जो लोग ऐसा सोचते है, वे पूरी तरह गलत हैं। यह एक वास्तविक लक्षणों के साथ एक वास्तविक बीमारी है। अवसाद किसी कमज़ोरी की निशानी नहीं है और न ही ऐसी कोई चीज, जिसे आप खुद से बाहर निकाल सकते हैं। एक अच्छी बात यह है कि कुछ सही इलाज से अवसाद के मरीज़ इस स्थिति से बाहर निकल सकते हैं। आपको अवसाद है कैसे पता चले अवसाद की वजह से लोग नाखुश, निराश, पसंद की चीजों में इच्छा खो देना और रोने जैसी भावना को महसूस करते हैं। कई लोगों में अवसाद के साथ-साथ चिंता (एंग्जाइटी) के लक्षण भी देखे जा सकते हैं। इसके साथ कुछ शारीरिक लक्षण भी हो सकते हैं, जैसे- लगातार थकान महसूस करना, अधिक सोना, भूख न लगना, यौन संबंध में अरुचि और कई तरह के दर्द होना। अवसाद के लक्षण हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं। इसके सबसे हल्के लक्षणों में लगातार जोश या उत्साह में कमी महसूस कर सकते हैं, जबकि इसके गंभीर लक्षणों में आप खुद को नुकसान पहुंचाने की सोच सकते हैं और यह भी कि जिंदगी जीने के लायक नहीं है। ज्यादातर लोग बुरे समय में तनाव, नाख़ुशी और चिंता का अनुभव करते हैं। अवसाद के संकेत होने की बजाय कुछ समय बाद आपकी उदासी में सुधार हो सकता है। हल्की मनोदशा और अवसाद के बारे में और जानें। डॉक्टर से कब मिलना चाहिए कई लोग अवसाद के बाद भी डॉक्टर से मदद लेने में बहुत समय लगा देते है, पर अच्छा होगा कि आप इसमें देरी न करें, जितनी जल्दी आप डॉक्टर से मिलेंगे, उतनी ही जल्दी आपको उपचार मिल सकता है। अवसाद के क्या कारण हैं ? अवसाद के पारिवारिक इतिहास वाले लोगों में स्वयं इसका अनुभव करने की अधिक संभावना होती है। लेकिन बिना किसी स्पष्ट कारण के भी आपको अवसाद हो सकता है। अवसाद के कारणों के बारे में और पढ़ें। अवसाद बहुत सामान्य स्थिति है, जो हर 10 में से एक इंसान को अपनी जिंदगी में प्रभावित करती है। यह पुरुषों, महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों में से किसी को भी प्रभावित कर सकती है। आंकड़ों से पता चलता है कि ब्रिटेन में 5 से 16 वर्ष की उम्र के लगभग 4% बच्चे चिंतित या उदास हैं। अवसाद के उपचार अगर आपको हल्का अवसाद है तो डॉक्टर आपकी प्रगति की निगरानी करते हुए आपको कुछ समय के लिए इंतजार करने को कह सकते हैं, ताकि अवसाद खुद ही ठीक होने की संभावना रहे। इसे "वॉचफुल वेटिंग" कहा जाता है। डॉक्टर आपको स्वयं-सहायता समूहों और व्यायाम जैसे जीवनशैली उपायों का सुझाव भी दे सकते हैं। टॉकिंग थेरेपी और कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी(CBT) जैसे उपचारों का इस्तेमाल अक्सर हल्के अवसाद के लिए किया जाता है। ये मध्यम अवसाद को सुधारने में सहायक नहीं हैं। कभी-कभी एंटीडिप्रेसेंट्स(अवसाद रोधी दवाओं) की भी सलाह दी जाती है। मध्यम और गंभीर अवसाद के लिए कभी-कभी टॉकिंग थेरेपी और एंटीडिप्रेसेंट्स के संयोजन की सलाह दी जाती है। अगर गंभीर अवसाद है तो आपको गहन बात करने वाले उपचार और दवाओं के लिए मानसिक स्वास्थ्य टीम के पास भेजा जा सकता है। अवसाद के साथ जीना खुद की सहायता करने वाली किताब पढ़ना और सहायता करने वाले ग्रुप में शामिल होना भी सही रहता है। इनसे आपको यह समझने में सहायता मिलती है कि आप किस वजह से उदास महसूस करते हैं। एक समान स्थिति में दूसरों के साथ अपने अनुभवों को बाँटना भी बहुत सहायक हो सकता है। अवसाद को हराने में सहायक आपकी जिंदगी में आए बदलावों के बारे में और पढ़ें लक्षण अवसाद के लक्षण हफ्तों या महीनों तक रह सकते हैं और इतने बुरे हो सकते हैं, जिससे आपके काम, सामाजिक जीवन और पारिवारिक जीवन पर भी असर पड़ सकता है। अवसाद के कई अन्य लक्षण हैं, जो नीचे दी गई सूची में बताए गए हैं. मनोवैज्ञानिक लक्षण लगातार उदास और दुखी रहना सामान्य से अधिक धीरे चलना या बोलना अवसाद के सामाजिक लक्षणों में शामिल हैं : काम में अच्छा न कर पाना अवसाद कितना गंभीर है, डॉक्टर बताते हैं : हल्का अवसाद – आपकी रोज़ाना की जिंदगी में कुछ असर डालता है दुख एक नुकसान की पूरी तरह से स्वाभाविक प्रतिक्रिया है, जबकि अवसाद एक बीमारी है जो लोग दर्द में हैं, उनमें दुख और नुकसान की भावना आती-जाती रहती है, लेकिन वे फिर भी जिंदगी का आनंद लेने और भविष्य के लिए उत्सुक होते हैं। इसके विपरीत, अवसाद से ग्रस्त लोग लगातार दुखी महसूस करते हैं। वह किसी चीज का आनंद नहीं ले पाते और अपने भविष्य के बारे में सकारात्मक होना मुश्किल मानते हैं। दुख से मुकाबला करने के बारे में पढ़ें। अन्य तरह के अवसाद प्रसव के बाद अवसाद(postnatal depression) - कुछ औरतों में बच्चा होने के बाद अवसाद उत्पन्न होता है। यह प्रसव के बाद के अवसाद के नाम से जाना जाता है और इसका इलाज अन्य प्रकार के अवसाद की तरह ही टॉकिंग थेरेपी और अवसाद रोधी दवाओं से होता है। कारण कुछ लोगों के लिए अवसाद का कारण परेशान होना और तनावपूर्ण जिंदगी की घटनाएँ, जैसे कि दुख, तलाक, बीमारी, बेकारी, नौकरी या पैसे की चिंता हो सकता है। लोग अक्सर “डाउनवार्ड स्पाइरल” के बारे में बात करते हैं, जो अवसाद की ओर ले जाता है। उदाहरण के लिए, अगर आपका रिश्ता आपके साथी से टूट जाए, तो संभावना है कि आप दुख महसूस करेंगे। आप दोस्तों और परिवार से उम्मीद रखना बंद कर सकते हैं और अधिक शराब पीना शुरू कर सकते हैं। यह सब आपको बदतर महसूस करा सकता है, जो आपको अवसाद की ओर ले जाता है। कुछ अध्ययनों ने सलाह दी है कि जैसे-जैसे आप बड़े होते हैं, आपको अवसाद होने की संभावना ज्यादा होती है और यह ऐसे लोगों में ज्यादा आम है, जो कठिन सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों में रहते हैं। अवसाद के संभावित ट्रिगर में से कुछ नीचे बताए गए हैं- तनावपूर्ण घटनाएं व्यक्तित्व पारिवारिक इतिहास जन्म देना अकेलापन शराब और ड्रग्स कैनबिस यानी भांग आपको आराम दिलाने में मदद कर सकती है, लेकिन इसके भी सबूत हैं कि यह अवसाद उत्पन्न कर सकती है, खासतौर पर किशोरों में। शराब के साथ 'अपने दुखों में डूबना', सही नहीं है। शराब अवसाद उत्पन्न करने की सूची में आती है, जो वास्तव में अवसाद को और ज्यादा गंभीर बनाती है। रोग कुछ लोगों में उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली के साथ समस्याओं के परिणामस्वरूप एक क्रियाशील थायरॉइड(हाइपोथाइरोडिज्म) हो सकता है। कुछ दुर्लभ मामलों में मामूली सिर की चोट आपकी पीयूष ग्रंथि(पिट्यूटरी ग्लैंड) को नुकसान पहुंचा सकती है। यह ग्रंथि आपके मस्तिष्क में एक मटर के आकार जैसी होती है और थायरॉइड-उत्तेजक हार्मोंस पैदा करती है। यह कई लक्षणों का कारण बन सकता है, जैसे कि अत्यधिक थकान, सेक्स में कम रुचि (कामेच्छा में कमी), जो अवसाद का कारण बन सकती है। रोग की पहचान आपको डॉक्टर से बात करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है, अगर : आपको अवसाद के लक्षण हैं और सुधर नहीं रहे हैं अवसाद के लिए कोई शारीरिक परीक्षण नहीं होता। लेकिन आपका डॉक्टर आपकी जांच कर सकता है और कुछ अन्य स्थितियों का पता लगाने के लिए कुछ मूत्र या रक्त परीक्षण कर सकता है, जिनके क्रियाशील थायरॉइड जैसे लक्षण होते हैं। अगर आपको डिप्रेशन है प्रमुखता से डॉक्टर आपसे आपके स्वास्थ्य के बारे में बहुत से ऐसे सवाल पूछेंगे कि कैसे आपकी भावनाएं आपको मानसिक और शारीरिक रूप से प्रभावित करती हैं। आप जवाब देने में खुले और ईमानदार रहने की कोशिश करें। अपने डॉक्टर को लक्षण बताएं और यह भी कि कैसे वे आपको प्रभावित करते हैं। ऐसा करना आपके डॉक्टर को यह जानने में मदद करेगा कि क्या आपको अवसाद है और यह कितना गंभीर है। आपकी डॉक्टर से की गई चर्चा गुप्त रहेगी। यह नियम तभी तोड़ा जा सकता है जब खुद को या दूसरों को इससे विशेष नुकसान का खतरा हो और परिवार के सदस्य या देखभाल करने वाले को यह बताना उस खतरे को कम करता हो। क्लिनिकल डिप्रेशन के बारे में पढ़ें। इलाज ऑनलाइन सीबीटी(online CBT in Hindi) ज्यादा जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से पूछें या ऑनलाइन सीबीटी और उपलब्ध पाठ्यक्रमों के बारे में और पढ़ें। पारस्परिक चिकित्सा(Interpersonal therapy, आईपीटी) मनोवेगीय मनोचिकित्सा(Psychodynamic psychotherapy, साइकोडाइनामिक साइकोथेरेपी) आप जो कुछ भी करते हैं या कहते हैं, जो आपकी समस्याओं को बढ़ा सकता है, यह आपको उन छिपी हुई चीजों से अवगत कराने में मदद करता है मनोचिकित्सा के बारे में और जानें। परामर्श (काउंसलिंग) परामर्श उन लोगों के लिए उपयुक्त है, जो मूल रूप से स्वस्थ होते हैं, लेकिन उन्हें वर्तमान संकट से निपटने में मदद की जरूरत होती है, जैसे कि क्रोध, रिश्ते से जुड़े मुद्दे, शोक, रोज़गार छूटना, बांझपन या कोई गंभीर बीमारी। सहायता लेना एंटीडिप्रेसेंट्स(अवसादरोधी दवाएं, antidepressents in Hindi) बहुत से लोग मध्यम और गंभीर अवसाद में एंटीडिप्रेसेंट्स से लाभ उठाते हैं, लेकिन सभी ऐसा नहीं करते। यह आपके अनुकूल हो सकती है, लेकिन दूसरे के लिए नहीं। आपको यह जानने के लिए कि कौन सी दवा आपके लिए काम करती है, आपको दो या उससे ज्यादा उपचार की आवश्यकता पड़ सकती है। अलग-अलग प्रकार की एंटीडिप्रेसेंट एक दूसरे के साथ काम करती हैं, हालांकि इन दवाइयों के दुष्प्रभाव अलग-अलग लोगों पर अलग-अलग हो सकते हैं। जब एंटीडिप्रेसेंट्स लेना शुरू करते हैं तो आपको अपने डॉक्टर और विशेषज्ञ नर्स से हर हफ्ते या कम से कम हर 4 सप्ताह में मिलने की आवश्यकता हो सकती है, यह जानने के लिए कि दवाएँ कितने अच्छे तरीके से काम कर रही हैं। अगर वे काम कर रही हैं तो आपको अपने लक्षणों को कम करने के लिए उन दवाओं को कम से कम 4 से 6 महीने तक लेना जरूरी होता है। यदि आपके अतीत में अवसाद का कोई कारण रहा है तो आपको 5 साल या उससे अधिक समय के लिए एंटीडिप्रेसेंट्स(अवसादरोधी दवाएँ) लेने की जरूरत पड़ सकती है। एंटीडिप्रेसेंट्स कोई लत वाली दवा नहीं है। अगर आप उन्हें अचानक से लेना बंद कर देते हैं या आप खुराक लेना भूल जाते हैं तो आपको कुछ संकेत नज़र आ सकते हैं। (नीचे देखें) सेलेक्टिव सेरोटोनिन रिअप्टेक इनहिबिटर (SSRIs) ये दवाएँ आपके दिमाग में सेरोटोनिन नामक एक प्राकृतिक रसायन को बढ़ाने में मदद करती हैं। सेरोटोनिन को मूड अच्छा करने का रसायन माना जाता है। एसएसआरआई (SSRIs) पुराने एंटीडिप्रेसेंट्स की तरह ही काम करती हैं और इनके दुष्परिणाम कम मात्रा में होते हैं। हालांकि इनसे कुछ दिक्कतें आ सकती हैं, जैसे- उल्टी जैसा महसूस करना, सिर दर्द, मुंह का सूख जाना और यौन संबंध बनाने में समस्या पैदा होना। हालांकि इसके दुष्परिणाम समय के साथ सुधर जाते हैं। कुछ एसएसआरआई (SSRIs) 18 साल से कम उम्र के बच्चों और युवाओं के लिए सही नहीं हैं। रिसर्च में यह पता चलता है कि यदि इनका उपयोग 18 साल से कम उम्र के युवाओं द्वारा किया जाता है तो उनमें खुद को नुकसान पहुंचाने और आत्महत्या जैसे व्यवहार का खतरा बढ़ सकता है। फ्लुक्सिटाइन ही एक ऐसी एसएसआरआई (SSRIs) है, जिसे 18 साल से कम उम्र के युवाओं के लिए निर्धारित किया जा सकता है और वह भी तब, जब किसी विशेषज्ञ ने ऐसा कहा हो। वोर्टियॉक्सिटिन (Vortioxetine) (ब्रिनटेलिक्स Brintellix या लुन्डबैक Lundbeck) एक एसएसआरआई है, जिसे युवाओं में गंभीर अवसाद के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ एंड केयर एक्सिलेंस (एनआईसीई) द्वारा लेने का सुझाव दिया गया है। वोर्टियॉक्सिटिन (Vortioxetine) से जुड़े दुष्प्रभावों में असामान्य सपने देखना, कब्ज, दस्त, चक्कर आना, खुजली, मितली और उल्टी आना शामिल है। ट्राइसाइक्लिक एंटीडिप्रेसेंट्स(TCAs) टीसीए जिसमें इमिप्रेमाइन(इमिप्रामिल) और एमिट्रिप्टिलाइन शामिल हैं, एसएमआरआई की तुलना में अधिक समय तक रहते हैं। ये आपके दिमाग में सेरोटोनिन और नॉराड्रेनालिन रसायनों के स्तर को बढ़ाने का काम करते हैं। ये दोनों आपका मूड सही करने में मदद करते हैं। ये आमतौर पर काफी सुरक्षित होते हैं, लेकिन अगर आप टीसीए ले रहे हैं तो कैनबिस लेना एक बुरा विचार हो सकता है, क्योंकि इसकी वजह से आपके दिल की धड़कन तेज हो सकती है। टीसीए(TCAs) के दुष्प्रभाव एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भिन्न होते हैं, लेकिन इसमें मुंह का सूखना, धुंधला दिखना, कब्ज, मूत्र करने में समस्या, पसीना आना, रोशनी में कमी और अधिक उनींदापन शामिल हो सकते हैं। आमतौर पर इसके दुष्परिणाम 7 से 10 दिन में कम हो जाते हैं, क्योंकि आपके शरीर को दवा की आदत हो जाती है। अन्य एंटीडिप्रेसेंट्स(अवसादरोधी दवाएं) वेनलाफैक्सिन और डुलोक्सेटीन को सेरोटोनिन– नॉराड्रेनालिन रिअप्टेक इनहिबिटर्स (SNRIs) के रूप में जाना जाता है। टीसीए की तरह ये आपके दिमाग में सेरोटोनिन और नॉराड्रेनालिन के स्तर को बदल देते हैं। अध्ययनों से पता चला है कि एसएनआरआई (SNRIs) एसएसआरआई (SSRIs) की तुलना में ज्यादा असर करती हैं, लेकिन इन्हें नियमित रूप से लेने का सुझाव नहीं दिया जाता, क्योंकि ये आपके रक्तचाप को बढ़ा सकती हैं। लक्षणों का लौटना पेट की खराबी ये लक्षण दवाई तुरंत रोकने के बाद दिखाई देते हैं, इसलिए अवसाद से राहत के लक्षणों से इन्हें अलग करना आसान होता है, जो कुछ हफ्तों बाद होते हैं। और जानकारी: इसका उद्देश्य आपके दिमाग व शरीर में एक बेहतर समझ विकसित करना और ज्यादा तारीफ व कम चिंता के साथ रहना सीखना है। माइंडफुलनेस(सचेतनता) का सुझाव नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ एंड केयर एक्सिलेंस ने उन लोगों में अवसाद को रोकने के लिए दिया है, जिनके अतीत में 3 या उससे अधिक अवसाद हुआ हो। माइंडफुलनेस के बारे में और जानें। सेंट जॉन्स वार्ट कुछ सबूत हैं कि इससे हल्के अवसाद में मदद मिलती है। मगर डॉक्टर इसकी सलाह नहीं देते, क्योंकि इसमें सक्रिय अवयवों की मात्रा अलग ब्रांडों और अलग बैचों में भिन्न होती है। लिहाजा आप कभी भी अनुमान नहीं लगा सकते कि इसका आप पर क्या असर होने वाला है। सेंट जॉन्स वार्ट को बाकी दवाइयों के साथ लेना, मसलन एंटीकान्वल्सेंट्स, एंटीकॉगुलेंट्स, एंटीडिप्रेसेंट्स और गर्भनिरोधक दवाइयों के साथ लेने से गंभीर दिक्कतें सामने आ सकती हैं। अगर आप गर्भवती हैं या फिर बच्चे को दूध पिला रही हैं तो आपको सेंट जॉन्स वार्ट नहीं लेनी चाहिए, क्योंकि हम नहीं जानते कि यह सुरक्षित है। सेंट जॉन्स वार्ट गर्भनिरोधक दवाई से मिल कर सकता है, जिससे गर्भनिरोधक दवाई का प्रभाव कम हो सकता है। इलेक्ट्रोकोन्वल्सिव थेरेपी (ECT) ज्यादातर लोगों के लिए ईसीटी गंभीर अवसाद से निजात दिलाने में प्रभावी होती है। हालांकि कुछ महीनों बाद इसका प्रभाव खत्म होने लगता है। कुछ लोगों को ईसीटी के बाद थोड़े समय के लिए सिर दर्द, याददाश्त की दिक्कतें, मांसपेशियों में दर्द और मितली आने जैसे दुष्प्रभाव भी सामने आते हैं। एनआईसीई (NICE) के द्वारा ईसीटी के दो तरीकों की सलाह दी जाती है - ट्रांसक्रेनियल डायरेक्ट करंट स्टिमुलेशन (tDCS) और रिपिटीटिव ट्रांसक्रेनियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन (rTMS)। ट्रांसक्रेनियल डायरेक्ट करंट स्टिमुलेशन (tDCS) ये इलेक्ट्रोड्स छोटी पोर्टेबल बैट्री से चलने वाले स्टिमुलेटर से जुड़े होते हैं। ये दिमाग में लगातार हल्की ताकत का करंट पहुँचाता है। ये बिजली का करंट दिमाग की गतिविधियों को उत्तेजित करके अवसाद के लक्षणों को सुधार देता है। आप पूरी प्रक्रिया के दौरान जागृत और सतर्क रहते हैं, जिसका कार्यान्वयन एक प्रशिक्षित डॉक्टर द्वारा किया जाता है। हालांकि कभी-कभी tDCS स्व-नियंत्रित भी किया जा सकता है। इस इलाज को अवसाद के बाकी इलाज के साथ खुद भी अपने ऊपर किया जा सकता है। उपचार सत्र रोज़ाना किए जाते हैं और लगभग 20-30 मिनट तक चलते हैं, उपचार का एक कोर्स आम तौर पर कुछ हफ्तों तक चलता है। टीडीसीएस(tDCS) के साथ इलाज सुरक्षित है और कई मामलों में इसे प्रभावकारी पाया गया है। टीडीसीएस(tDCS) के कितने सत्रों की जरूरत होती है और इसका प्रभाव कितने वक्त तक बना रहता है, इसे लेकर अनिश्चितता है। लिहाजा इस क्षेत्र में और शोध किए जाने की जरूरत है। एनआईसीई (NICE) के पास अवसाद के लिए ट्रांसक्रेनियल डायरेक्ट करंट स्टिमुलेशन के बारे में और जानकारियाँ हैं। रिपीटीटिव ट्रांसक्रेनियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन (rTMS) rTMS के इलाज में सामान्यतया दो से छह हफ्तों के 30 मिनट के कोर्स के दैनिक सत्र दिए जाते हैं। सबूतों की मानें तो rTMS अवसाद के लिए सुरक्षित है। हालांकि इसका प्रभाव अलग-अलग लोगों में भिन्न-भिन्न हो सकती है। एनआईसीई (NICE) के पास रिपीटीटिव ट्रांसक्रेनियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन के बारे में और भी जानकारी है। लिथियम(Lithium) लिथियम के दो प्रकार होते हैं - लिथियम कार्बोनेट और लिथियम साइट्रेट। दोनों ही बराबर प्रभाव रखते हैं। मगर यदि आप इनमें से एक ले रहे हैं और ये आप पर काम कर रहा है तो बेहतर होगा कि आप इसे न बदलें। यदि आपके रक्त में लिथियम का स्तर बहुत ज्यादा हो जाता है, तो यह विषाक्त हो सकता है। इसलिए जब आप दवा ले रहे हैं तो आपको अपने लिथियम के स्तर की जांच के लिए हर तीन महीने में रक्त परीक्षण की भी आवश्यकता होगी। आपको कम नमक वाली खुराक से बचना होगा, क्योंकि यह भी लीथियम के विषाक्त होने का कारण बन सकती है। अपने डॉक्टर से अपने आहार के बारे में सलाह लें। मानसिक अवसाद मनोविकृति के साथ अवसाद को मानसिक अवसाद के तौर पर भी जाना जाता है। गंभीर अवसाद के लक्षण गंभीर अवसाद के अन्य आम लक्षण: थकावट (थकान) मनोविकृति के लक्षण: भ्रम - ऐसे विचार या विश्वास, जिनके सत्य होने की संभावना नहीं होती 'साइकोमोटर एजिटेशन' भी आम व्याकुलता है। इसका मतलब है कि मरीज़ आराम करने या शांत बैठने में सक्षम नहीं होता, लगातार दौड़ता रहता है। दूसरी चरम अवस्था में मानसिक अवसाद वाले व्यक्तियों में साइकोमोटर मंदता आ जाती है, जिसमें उनके विचार और शारीरिक गतिविधियाँ धीमी हो जाती हैं। मानसिक अवसाद वाले लोगों में आत्महत्या के बारे में सोचने का जोखिम काफी बढ़ जाता है। मानसिक अवसाद के क्या कारण होते हैं? कुछ तनाव भरी जीवन की घटनाओं जैसे वियोग, तलाक, गंभीर बीमारी, आर्थिक समस्याओं से ये हो सकता है। आनुवंशिकी भी इसमें अहम भूमिका निभाती है, जैसे कि गंभीर अवसाद परिवारों में हो सकता है। मगर इसका पता नहीं चल पाया है कि कुछ लोगों में मनोविकृति क्यों फैल जाती है। क्लिनिकल डिप्रेशन के और कारणों के बारे में पढ़ें। मानसिक अवसाद का इलाज दवाएँ- एंटीसाइकोटिक्स और एंटीडिप्रेसेंट्स को मिलाकर लेने से मनोविकृति के लक्षणों को दूर किया जा सकता है जिन लोगों को गंभीर अवसाद होता है और एंटीडिप्रेसेंट्स समेत बाकी उपचारों से कोई फायदा नहीं होता है, उन्हें इलेक्ट्रोकन्वल्सिव थेरेपी(ईसीटी) की सलाह दी जाती है। आम तौर पर इलाज प्रभावी होता है, मगर उनके बरताव पर बारीकी से नजर रखने के लिए बाद में भी मिलना-जुलना जरूरी होता है। दूसरों के लिए मदद लेना यदि किसी व्यक्ति में पहली बार मनोविकृति के लक्षण दिखाई दिए हैं तो आप उस व्यक्ति के डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं। यदि आपको लगता है कि उस व्यक्ति के लक्षण उस व्यक्ति को या दूसरों के लिए खतरे का जोखिम हैं तो आप: उन्हें नज़दीकी दुर्घटना एवं आपातकालीन विभाग में ले जाएं यदि वे मान जाते हैं SANE(एसएएनई) मनः मनोविकार साथ रहना बारे में बात करना किसी अन्य व्यक्ति या समूह के साथ अपनी समस्या साझा करने से आपको मदद और अंतर्दृष्टि मिल सकती है। शोध बताते हैं कि बात करने से लोग अवसाद से ठीक हो सकते हैं और तनाव का सामना बेहतर तरीके से कर सकते हैं। आप अपने मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा करने और दूसरों के साथ अपनी परेशानियों को साझा करने में सहज महसूस नहीं करते। यदि यह स्थिति है, तो आप क्या महसूस कर रहे हैं इसे लिखकर या अपनी भावनाओं को कविता या कला के माध्यम से जाहिर करने पर भी आपको मूड बेहतर करने में मदद मिलती है। धूम्रपान, ड्रग्स और शराब का सेवन कैनबिस के प्रति अतिरिक्त सतर्कता बरतें। आपको लग सकता है कि ये नुकसानरहित है, मगर शोध से पता चलता है कि मानसिक बीमारी और अवसाद का भी भांग से सीधा संबंध है। सबूत बताते हैं कि यदि आप कैनबिस का सेवन करते हैं तोः ये आपके अवसाद के लक्षणों को और बदतर बना देती है ये पेज आपके लिए उपयोगी हो सकते हैं: धूम्रपान बंद करनाः लत से मुकाबला करना अवसाद से जूझ रहे व्यक्ति की देखभाल करना यदि आप अवसाद से पीड़ित किसी व्यक्ति की मदद कर रहे हैं तो उसके साथ आपका रिश्ता और आपके परिवार की जिंदगी तनावपूर्ण हो सकती है। आप जो कर रहे हैं उसका एक नुकसान महसूस कर सकते हैं। एक सहायता समूह की तलाश करने और एक समान स्थिति में दूसरों से बात करने से मदद मिल सकती है। यदि आपको रिलेशनशिप या विवाह संबंधी कठिनाइयाँ आ रही हैं तो आप किसी रिलेशनशिप काउंसलर से संपर्क कर सकते हैं। वह आपसे और आपके साथी से बात कर सकता है। महिलाओं के मुकाबले पुरुष मदद मांगने में कम आगे आते हैं और अवसाद होने पर अल्कोहल या ड्रग्स की ओर आसानी मुड़ जाते हैं। शोक का सामना शोक के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करें। अवसाद और ख़ुदकुशी कोई अवसाद के कारण ख़ुदकुशी की ओर बढ़ रहा है, इसकी चेतावनी के संकेत: अंतिम व्यवस्था करना जैसे संपत्ति दे देना, वसीयत बनाना या सभी दोस्तों को अलविदा कह देना आत्महत्या का ख़याल करने वाले किसी दोस्त या रिश्तेदार की मदद करना उनके लिए किसी पेशेवर से मदद लें व्यक्ति के लिए निर्धारित दवाओं की तरह बिना पर्चे वाली दवाएँ, जैसे दर्दनिवारक दवाइयाँ भी खतरनाक हो सकती है। साथ ही तेज धार वाली चीजें और जहरीले घरेलू रसायन जैसे ब्लीच आदि को वहां से हटा दें।क्लिनिकल डिप्रेशन
9th April, 2024 • 33 min read
यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया था। इस लेख का मूल संस्करण यहां देखा जा सकता है। यह Charlotte Haigh द्वारा लिखा गया है और Dr Emily Blount ने इसकी मेडिकल समीक्षा की है।
इस लेख में
**आपको अवसाद है कैसे पता चले**
**डॉक्टर से कब मिलना चाहिए**
**अवसाद के क्या कारण हैं ?**
**अवसाद के उपचार**
**अवसाद के साथ जीना**
**लक्षण**
**मनोवैज्ञानिक लक्षण**
**शारीरिक लक्षण**
**अवसाद की गंभीरता**
**दुख और अवसाद**
**अन्य तरह के अवसाद**
**कारण**
**तनावपूर्ण घटनाएं**
**व्यक्तित्व**
**पारिवारिक इतिहास**
**जन्म देना**
**अकेलापन**
**शराब और ड्रग्स**
**रोग**
रोग की पहचान
**इलाज**
**सहायता लेना**
**लक्षणों का लौटना**
**और जानकारी:**
**अन्य उपचार**
**मानसिक अवसाद**
**गंभीर अवसाद के लक्षण**
**मनोविकृति के लक्षण:**
**मानसिक अवसाद के क्या कारण होते हैं?**
**मानसिक अवसाद का इलाज**
**दूसरों के लिए मदद लेना**
**धूम्रपान, ड्रग्स और शराब का सेवन**
**शोक का सामना**
**अवसाद और ख़ुदकुशी**
**आत्महत्या का ख़याल करने वाले किसी दोस्त या रिश्तेदार की मदद करना**
परिचय
अवसाद(depreesion) सिर्फ़ कुछ दिनों के लिए महज दुखी महसूस करने या तंग आ जाने से ज्यादा गंभीर स्थिति है।
अवसाद का असर लोगों पर अलग-अलग तरीके से हो सकता है और लोगों में इसके कई तरह के लक्षण हो सकते हैं।
अगर आपको लगता है की आप भी अवसाद के शिकार है तो अपने डॉक्टर से मदद लेना जरूरी है।
कभी-कभी अवसाद होने के कई कारण बन जाते हैं। जींदगी को बदलने वाली घटनाएँ, जैसे- शोक की दशा, अपनी नौकरी खो देना, या एक बच्चे का होना भी कारण हो सकता है।
अवसाद के उपचार में जीवनशैली में बदलाव, चिकित्सा और दवाओं को संयोजन कारगर साबित हो सकता है। आपका इलाज इस पर आधारित होगा कि आपको अवसाद किस तरह का है- हल्का, मध्यम या गंभीर।
जीवन जीने के ढंग में बदलाव करने से, अधिक व्यायाम करने से, शराब व धूम्रपान छोड़ने से और स्वस्थ खान-पान अपनाने से अवसाद पीड़ित कई लोगों को फायदा होता है।
अवसाद के लक्षण जटिल और अन्य लोगों में व्यापक रूप से अलग-अलग हो सकते हैं। पर सामान्य नियम के अनुसार, अगर आप अवसाद से पीड़ित हैं, तो आप उदास, निराश और उन चीजों में रुचि खो देते हैं, जिसका आप आनंद लेते थे।
अवसाद के मनोवैज्ञानिक लक्षणों में शामिल हैं :
असहाय और निराश महसूस करना
आत्मसम्मान कम होना
रोने जैसा महसूस करना
अपराध-बोध महसूस करना
चिड़चिड़ापन और दूसरों को सहन न कर पाना
चीजों में प्रेरणा की कमी और रुचि न होना
निर्णय लेने में मुश्किल होना
जिंदगी में आनंद न ले पाना
चिंतित और बेचैन होना
खुद को खत्म करने या खुद को नुकसान पहुंचाने के विचार होना
शारीरिक लक्षण
अवसाद के शारीरिक लक्षणों में शामिल हैं :
भूख और वजन में बदलाव(आमतौर पर घटना, लेकिन कभी-कभी बढ़ना)
कब्ज
न समझ आने वाले दर्द और पीड़ा
ऊर्जा की कमी
यौन क्रिया में कमी(कामेच्छा में कमी)
मासिक चक्र में बदलाव
नींद में बाधा - उदाहरण के लिए, रात को सोने और सुबह-सुबह जल्दी जागने में मुश्किल होना
सामाजिक लक्षण
दोस्तों के साथ मिलने से बचना और सामाजिक कार्यों में कम भाग लेना
अपने शौक और हितों की उपेक्षा करना
अपने घर और पारिवारिक जीवन में कठिनाइयाँ आना
अवसाद की गंभीरता
अवसाद धीरे-धीरे आ सकता है, इसलिए कुछ गलत हो रहा है, यह पहचानने में मुश्किल हो सकती है। कुछ लोग यह जाने बिना कि वे अस्वस्थ हैं, अपने लक्षणों का सामना करने की कोशिश करते हैं। कभी-कभी आपको यह समझाने के लिए कि आपके साथ कुछ गलत हो रहा है, किसी दोस्त या परिवार के सदस्य की जरूरत पड़ सकती है।
मध्यम अवसाद - आपकी रोज़ाना की जिंदगी में महत्वपूर्ण असर डालता है
गंभीर अवसाद - आपकी रोज़ाना की जिंदगी को लगभग असंभव बना देता है, कुछ लोग गंभीर अवसाद में मानसिक लक्षणों का अनुभव कर सकते हैं
दुख और अवसाद
दुख और अवसाद के बीच अंतर करना मुश्किल हो सकता है। दोनों में एक जैसे लक्षण होते हैं, लेकिन दोनों में महत्वपूर्ण अंतर होता है।
अवसाद के अलग-अलग प्रकार हैं और कुछ स्थितियों के लक्षणों में से अवसाद एक लक्षण हो सकता है, उनमें शामिल हैं :
द्विध्रुवीय विकार(bipolar disorder) - इसको "मेनिक डिप्रेशन" के नाम से भी जाना जाता है। द्विध्रुवीय विकार में अवसाद और उच्च स्तर के पागलपन के लक्षण होते है। अवसाद के लक्षण क्लिनिकल डिप्रेशन (रोग-विषयक अवसाद ) की तरह ही हैं, लेकिन पागलपन के लक्षणों में हानिकारक व्यवहार शामिल हो सकते हैं, जैसे कि जुआ खेलना, फ़िजूल खर्च और असुरक्षित यौन संबंध।
सीजनल अफेक्टिव डिसॉर्डर (एसएडी) - इसे विंटर डिप्रेशन यानी "शीतकालीन अवसाद" के नाम से भी जाना जाता है। एसएडी एक प्रकार का अवसाद है, जो आमतौर पर सर्दियों से संबंधित होता है।
अवसाद के इलाज के बारे में और पढ़ें।
अवसाद का कोई एक कारण नहीं है। यह कई कारणों से हो सकता है और इसके अलग-अलग ट्रिगर हो सकते हैं।
अलग-अलग कारणों की वजह से डिप्रेशन हो सकता है, उदाहरण के लिए, बीमार होने के बाद बेचैन महसूस करना, किसी दर्दनाक घटना का अनुभव करना, जैसे कि दुख या शोक के कारण अवसाद हो सकता है।
कुछ लोग तनावपूर्ण स्थिति, जैसे दुख और रिश्तों के टूटना आदि से निकलने में समय लेते हैं। जब ये तनावपूर्ण घटनाएँ होती हैं और आप अपने दोस्तों और परिवार को नज़रअंदाज़ करते हैं और खुद ही इन समस्याओं से निपटने की कोशिश करते हैं, तब आपके अवसाद में आने का खतरा बढ़ जाता है।
अगर आप में कम आत्मसम्मान या खुद की आलोचना करने जैसे व्यक्तिगत लक्षण हैं तो आप अवसाद के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं। इसमें माता-पिता से विरासत में मिले आनुवंशिक कारण, आपकी जिंदगी के अनुभव, या दोनों कारण हो सकते हैं।
अगर आपके परिवार में से पहले किसी को अवसाद रहा है, जैसे कि माता पिता, भाई और बहन तो आप में भी अवसाद होने की अधिक संभावना है।
कुछ महिलाएं विशेष रूप से गर्भावस्था के बाद अवसाद में आ सकती हैं। हार्मोनल और शारीरिक बदलाव के साथ ही नए जीवन की जिम्मेदारियां प्रसव के बाद के अवसाद को जन्म देती हैं।
अपने परिवार और दोस्तों से दूर रहने के कारण आप में अवसाद का खतरा बढ़ सकता है।
जब लोग जिंदगी में दुख महसूस करते हैं तो कुछ लोग अधिक शराब और ड्रग्स लेना शुरू कर देते हैं, जिसका परिणाम अवसाद हो सकता है।
अगर आपको लंबे समय तक रहने वाली जानलेवा बीमारी जैसे कि कोरोनरी हार्ट डिजीज या कैंसर जैसी बीमारी रही हैं तो आपको अवसाद का खतरा ज्यादा हो सकता है।
सिर की चोट भी अवसाद का एक मुख्य कारण है। गंभीर सिर की चोट मनोदशा में बदलाव और भावनात्मक समस्याओं को ट्रिगर कर सकती है।
अगर आपको हर दिन, दो हफ्तों से ज्यादा अवसाद के लक्षण महसूस होते हैं तो आपको डॉक्टर से मदद जरूर लेनी चाहिए।
आपका मूड आपके काम, आपकी दिलचस्पी, आपके दोस्तों को और पारिवारिक संबंध को प्रभावित करता है
आपको आत्महत्या या खुद को नुकसान पहुंचाने के विचार आते हैं
कभी-कभी जब आप अवसाद में होते हैं तो यह कल्पना करना मुश्किल हो सकता है कि इलाज वास्तव में कोई मदद कर सकता है। लेकिन जितनी जल्दी आप इलाज कराएँगे, उतनी ही जल्दी आपके अवसाद में भी सुधार होगा।
बातचीत से उपचार
कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी(सीबीटी, CBT)
कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी(सीबीटी) यह पता लगाने में मदद करती है कि आपके विचार और व्यवहार आप पर कैसा असर करते है।सीबीटी का मानना है कि अतीत की घटनाओं ने आपको एक नया आकार दिया होगा, पर यह ज्यादातर इस बात पर ध्यान देता है कि आप वर्तमान में किस तरह से महसूस करते हैं, सोचते हैं और व्यवहार करते हैं।यह आपको नकारात्मक विचारों से बाहर आना सिखाता है - उदाहरण के लिए, नकारात्मक भावनाओं को चुनौती देने में योग्य होना। सीबीटी अवसाद और दूसरी मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं वाले लोगों के लिए उपलब्ध है, जिसमें यह उनकी मदद करता है। आपके पास सामान्य तौर पर एक छोटा कोर्स होता है, सीबीटी में प्रशिक्षित काउंसलर के साथ आमतौर पर 6 से 8 सत्रों में 10 से 12 सप्ताह तक का। कुछ मामलों में आपको सीबीटी ग्रुप में शामिल होने का ऑफ़र दिया जा सकता है।
ऑनलाइन सीबीटी एक ऐसा सीबीटी है, जो डॉक्टर द्वारा आमने-सामने की बजाय कंप्यूटर के माध्यम से दिया जाता है।
आपके पास साप्ताहिक सत्रों की एक सीरिज़ होगी, जिसमें आपको पेशेवर स्वास्थ्य-कर्मियों से सहायता मिलेगी। उदाहरण के लिए, ऑनलाइन सीबीटी आम तौर पर आपके डॉक्टर द्वारा निर्धारित की जाती है और इसके लिए आपको कंप्यूटर का उपयोग करना पड़ता है।
पारस्परिक चिकित्सा दूसरों के साथ आपके रिश्तों पर और आपके रिश्तो में होने वाली समस्याओं पर केंद्रित होती है, जैसे कि बातचीत करने में कठिनाई और दुख या शोक का सामना करना। कुछ सबूत हैं कि आईपीटी एंटीडिप्रेसेंट्स या सीबीटी की तरह ही असरदार है, लेकिन इसके लिए और शोध की जरूरत है।
मनोवेगीय मनोचिकित्सा में साइकोएनालिटिक थेरेपिस्ट आपको यह कहने के लिए प्रोत्साहित करेगा कि आपके दिमाग में क्या चल रहा है।
काउंसलिंग, चिकित्सा का एक रूप है, जो आपको जिंदगी में महसूस होने वाली समस्याओं के बारे में सोचने में मदद करता है ताकि आपको उनसे निपटने के नए तरीके मिल सकें। काउंसलर्स आपकी समस्याओं का समाधान ढूंढने में आपकी मदद करते हैं, पर आपको यह नहीं बताते कि क्या करना चाहिए।
ज्यादा जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से मिलें। वे आपको अवसाद से बचने के लिए लोकल टॉकिंग ट्रीटमेंट(स्थानीय बातचीत के द्वारा उपचार) के लिए भेज सकते हैं। आपके पास सेल्फ-रेफरल का विकल्प भी है। इसका मतलब यह है कि अगर आप अपने डॉक्टर से बात करना नहीं चाहते तो सीधे एक पेशेवर थेरेपिसट के पास जा सकते हैं।
एंटीडिप्रेसेंट्स वे दवाएँ हैं, जो अवसाद के लक्षणों का इलाज करती है। ये लगभग 30 विभिन्न प्रकारों में उपलब्ध हैं।
अगर आपके डॉक्टर को लगता है कि एंटीडिप्रेसेंट से आपको फायदा होगा तो आपको एक मॉडर्न टाइप दवा(एक आधुनिक किस्म की), जिसे सेलेक्टिव सेरोटोनिन रिअप्टेक इनहिबिटर (SSRIs) कहते हैं, निर्धारित की जाएगी। आम तौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले SSRI एंटीडिप्रेसेंट्स के उदाहरण हैं- पैरोक्सेटीन ( सैरोक्सैट), फ्लुओक्सेटीन (प्रोज़ैक) और सीतालोप्राम (सिप्रामिल)(paroxetine (Seroxat), fluoxetine (Prozac) and citalopram (Cipramil))।
ट्राइसाइक्लिक एंटीडिप्रेसेंट्स (TCAs) एंटीडिप्रेसेंट्स का एक समूह है, जो मध्यम और गंभीर अवसाद के इलाज के लिए सहायक है।
नई एंटीडिप्रेसेंट्स जैसे वेनलेफैक्सिन (एफेक्सोर), डुलोक्सेटीन (सिम्बल्टा या येन्त्रेव) और मिर्ताजापाइन (जिस्पिन सोल्टब), एसएसआई (SSRIs) और टीसीए (TCAs) के साथ थोड़े अलग तरीके से काम करती हैं।
एंटीडिप्रेसेंट्स उस तरह से नशे की लत नहीं है, जिस तरह से अवैध ड्रग्स और सिगरेट हैं, लेकिन जब आप इन्हें लेना बंद कर देते हैं तो आपको कुछ लक्षण दिख सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:
फ्लू जैसे लक्षण
चिंता
चक्कर आना
रात में अजीब सपने देखना
शरीर में बिजली के झटके जैसी संवेदना होना
ज्यादातर मामलों में ये काफी हल्के होते हैं और एक या दो हफ्ते से ज्यादा नहीं रहते। लेकिन कभी-कभी ये बहुत गंभीर हो सकते हैं। ये पेरोक्सेटीन(सेरोक्सेट) और वेनलाफैक्सिन (एफेक्सोर) की वजह से हो सकते हैं।
एंटीडिप्रेसेंट्स को असर दिखाने में कितना समय लगता है ?
क्या मैं एंटीडिप्रेसेंट्स के साथ शराब पी सकता हूं?
एंटीडिप्रेसेंट्स को कैसे रोका जाना चाहिए ?
अन्य उपचार
माइंडफुलनेस
माइंडफुलनेस में वर्तमान क्षण पर ध्यान देना और अपने विचारों, भावनाओं, शारीरिक संवेदनाओं तथा अपने मानसिक सुख की बेहतरी के लिए अपने आस-पास की दुनिया पर ध्यान केंद्रित करना शामिल होता है।
सेंट जॉन्स वार्ट एक हर्बल ट्रीटमेंट है, जिसे कुछ लोग अवसाद में लेते हैं। ये स्वास्थ्य खाद्य पदार्थ की दुकानों और फार्मेसी(मेडिकल स्टोर) पर उपलब्ध है।
जब बाकी एंटीडिप्रेसेंट्स काम नहीं करते हैं, तब गंभीर अवसाद की दशा में कभी-कभी इलेक्ट्रोकोन्वल्सिव थेरेपी (ईसीटी) की सलाह दी जाती है।
ट्रांसक्रेनियल डायरेक्ट करंट स्टिमुलेशन (tDCS) प्रक्रिया में सिर पर इलेक्ट्रोड्स लगाना शामिल है।
रिपीटीटिव ट्रांसक्रेनियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन (rTMS) में आपके सिर के सामने इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कॉयल को रखना होता है। इससे अलग-अलग तीव्रता और आवृत्तियों पर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक ऊर्जा को लगातार छोड़ा जाता है, जिससे दिमाग का एक हिस्सा उत्तेजित हो जाता है। इसे सेरेब्रल कॉर्टैक्स कहते हैं।
अगर आपने कई तरह के एंटीडिप्रेसेंट्स का प्रयोग कर लिया है और कोई सुधार नहीं मिला है तो डॉक्टर आपके नियमित इलाज के अलावा लिथियम नाम की एक दवाई ऑफर कर सकते हैं।
कुछ लोग अगर गंभीर क्लिनिकल डिप्रेशन से पीड़ित हैं तो वे मनोविकृति के मतिभ्रम और भ्रांतिमूलक सोच के लक्षणों का भी अनुभव कर सकते हैं।
गंभीर क्लिनिकल डिप्रेशन से पीड़ित व्यक्ति लगभग रोज़ाना दिन भर उदासी और निराशा का अनुभव करता है। उसे किसी चीज में कोई दिलचस्पी नहीं होती। दिन गुजारना उसे लगभग नामुमकिन लगता है।
चीजों में आनंद आना बंद हो जाना
नींद का पूरा नहीं होना
भूख में बदलाव
बेकार और दोषी महसूस करना
एकाग्र होने में असमर्थ होना और अनिश्चित होना
मौत और ख़ुदकुशी के ख्याल आना
मानसिक विकृति के सामाजिक और शारीरिक लक्षणों के बारे में और पढ़ें
मनोविकृति के क्षण होने का अर्थ है(मनोविकृति के एपीसोड्स), इन लक्षणों का अनुभव करना:
मतिभ्रम(हलूसिनेशन)- ऐसी आवाज़ों या बातों को सुनना और कुछ मामलों में सूंघना, महसूस करना, देखना, चखना, जो चीजें वहां नहीं हैं। आवाजों का सुनना एक आम मतिभ्रम है
भ्रम और मतिभ्रम लगभग हमेशा व्यक्ति की गहरी उदास मनोदशा को दर्शाते हैं - उदाहरण के लिए, उन्हें इन बातों के लिए राजी किया जा सकता है कि वे किसी चीज़ के लिए दोषी हैं, या उन्होंने कोई अपराध किया है।
अभी तक मानसिक अवसाद के कारणों को पूरी तरह समझा नहीं जा सका है। ये पता लगा है कि इसके पीछे एक कारण नहीं हो सकता और कई बातों से ये बढ़ सकता है।
मानसिक अवसाद झेलने वाले कई लोगों ने बचपन में प्रतिकूल घटनाओं का सामना किया होता है, जैसे कोई दर्दनाक घटना।
मानसिक अवसाद के इलाज में शामिल हैं :
मनोवैज्ञानिक पद्धतियां- आमने-सामने बातचीत के द्वारा कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी लोगों को मनोविकृति से ठीक होने में कारगर साबित हुई है
सामाजिक सहयोग- सामाजिक सहायता, जैसे शिक्षा, रोज़गार या आवास की ज़रूरतों में मदद करना
मरीज का जब तक इलाज किया जा रहा है, तब तक के लिए उसे कुछ वक्त के लिए अस्पताल में रहना पड़ सकता है।
मनोविकृति से पीड़ित लोगों अक्सर इस बात से अनजान होते हैं कि वे अजीब तरीके से सोच रहे हैं और बर्ताव कर रहे हैं। अंतर्दृष्टि की इस कमी को पूरा करने के लिए उस व्यक्ति के दोस्त, परिवार या देखभाल करने वालों की मदद ली जा सकती है। यदि किसी व्यक्ति को पहले भी मानसिक स्वास्थ्य स्थिति के लिए जांचा जा चुका है और आप ऐसे व्यक्ति के लिए चिंतित हैं और आपको लगता है कि उन्हें मनोविकृति हो सकती है तो आप सामाजिक कार्यकर्ता या सामाजिक मानसिक स्वास्थ्य उपचारिका (नर्स) से संपर्क कर सकते हैं।
तो उनके डॉक्टर या फिर स्थानीय बाहर के किसी डॉक्टर को बुलाएं
एंबुलेंस को बुलाएं
आगे की जानकारी
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यदि आपको अवसाद है तो शराब पीकर या धूम्रपान करके बेहतर महसूस हो सकता है। सिगरेट और शराब शुरुआत में मददगार लगते हैं, मगर लंबे अरसे बाद ये हालात को बद से बदतर बना देते हैं।
ज्यादा थकान और चीजें अरुचिकर महसूस होती हैं
पहले से ज्यादा अवसाद होने की संभावना होती है और ज्यादा बार
एंटीडिप्रेसेंट्स दवाओं से फायदा होना बंद हो जाता है।
एंटीडिप्रेसेंट्स दवाओं का इस्तेमाल बंद करने की संभावना बढ़ जाती है
पूरी तरह ठीक होने की संभावना कम हो जाती है
यदि आप बहुत ज्यादा शराब, ड्रग्स और धूम्रपान का सेवन करते हैं तो आपका डॉक्टर आपको इस विषय में सलाह दे सकते है।
नशा-मुक्ति के लिए सहायता
एल्कोहल से मुक्ति के लिए मदद
काम और आर्थिक स्थिति
यदि आपका अवसाद बहुत ज्यादा काम करने के कारण है या यह आपकी कार्य करने की क्षमता को प्रभावित कर रहा है तो आपको ठीक होने के लिए समय की आवश्यकता हो सकती है। हालांकि इस बात के भी सबूत हैं कि लंबे समय तक काम बंद रखने से अवसाद बदतर हो सकता है। इस बात के भी कई सबूत हैं कि वापस काम पर जाने से अवसाद की स्थिति में सुधार हुआ।बहुत ज्यादा तनाव से दूर रहना बेहद जरूरी है, और इस में काम संबंधी तनाव भी शामिल है। यदि आप कहीं काम करते हैं और कार्य का तनाव आपके लक्षणों को बढ़ा रहा है तो कम घंटों के लिए काम कर सकते हैं या फिर अधिक लचीले तरीके से काम कर सकते हैं, खासकर अगर नौकरी के दबाव आपके लक्षणों को ट्रिगर करते हैं।
ऐसा नहीं है कि जो व्यक्ति अवसाद से गुज़र रहा होता है सिर्फ उसी पर उसकी बीमारी का असर पड़ता है, उसके नज़दीकी लोग भी इससे प्रभावित होते हैं।
किसी नज़दीकी को खोना आपको अवसाद में धकेल सकता है। जिसे आप चाहते हैं, जब उनकी मृत्यु हो जाती है तो ये नुकसान इतना ज्यादा हो सकता है कि आपको लगता है कि आपके लिए ठीक होना नामुमकिन हो जाएगा। फिर भी समय और सही मदद और सहयोग के साथ जिंदगी को दोबारा जीना मुमकिन हो जाता है।
ख़ुदकुशी के ज्यादातर मामले मानसिक विकारों से जुड़े होते हैं और इनमें से ज्यादातर गंभीर अवसाद के कारण बढ़ते जाते हैं।
मौत या ख़ुदकुशी के बारे में बात करना- ये एक सीधा वक्तव्य हो सकता है जैसे कि ‘काश मैं मर चुका होता।’ मगर ज्यादातर अवसाद-ग्रस्त लोग इस बारे में अप्रत्यक्ष रूप से बात करते हैं, जैसे कि ‘शायद मरे हुए लोग हम से ज्यादा खुश होते होंगे।’ या ‘क्या ये बेहतर नहीं होगा कि सो जाएं और कभी भी नहीं जागें’
खुद को नुकसान पहुंचाना, जैसे अपने हाथ या पैर काटना या फिर सिगरेट से खुद को जलाना
मूड का अचानक बेहतर हो जाना। इसका मतलब हो सकता है कि उसने मरने का फैसला कर लिया है और इस फैसले के कारण वो बेहतर महसूस कर रहा है
यदि आप ख़ुदकुशी करने की सोच रहे हैं या फिर गहरे अवसाद में जा चुके हैं तो अपने डॉक्टर से जल्दी से जल्दी संपर्क करें। वो आपकी मदद कर सकते हैं।
यदि आप इनमें से कोई भी चेतावनी का संकेत अपने दोस्त या रिश्तेदार में देखते हैं तो :
उन्हें बताएं कि वे अकेले नहीं हैं और आप उनका ख्याल करते हैं
उनकी समस्याओं का समाधान तलाशने में उनकी मदद करें
यदि आपको लगता है कि फौरन खतरा है तो उनके साथ रहें या किसी अन्य को उनके साथ रखने के बाद आत्महत्या करने के सभी मुमकिन साधनों को वहां से हटा दें, जैसे दवाइयाँ।