\n बवासीर, जिसे पाइल्स भी कहा जाता है, गुदा और मलाशय की नसों में सूजन की एक स्थिति है। यह वैरिकोज़ वेन्स के समान होता है, जिसमें नसें सूज जाती हैं और गांठ बन जाती हैं। बवासीर होने के कई कारण हो सकते हैं: जिससे बवासीर हो सकता है। और हार्मोन्स के कारण नसें सूज जाती हैं। यदि आपको बवासीर के लक्षण महसूस होते हैं, तो चिकित्सा सलाह लेना और उचित उपचार प्राप्त करना महत्वपूर्ण है। बाहरी बवासीर (External hemorrhoids) ये मलाशय के ऊपर विकसित होते हैं और गुदा की सतह पर गांठ केजैसे दिखाई पड़ सकते हैं1। ये लक्षण बवासीर की गंभीरता पर निर्भर करते हैं और कभी-कभी जीवनशैली में बदलाव करने से या उचित उपचार से इन्हें कम किया जा सकता है। यदि आपको इनमें से कोई भी लक्षण महसूस होते हैं, तो चिकित्सा सलाह लेना महत्वपूर्ण है। बवासीर में फाइबर युक्त आहार और पानी का सेवन बढ़ाना चाहिए। फाइबर युक्त आहार से मल नरम होता है और मल त्यागने में आसानी होती है, जिससे बवासीर के लक्षणों में कमी आती है। ताजी हरी सब्जियां, फल, और पूरे अनाज का सेवन करना चाहिए। वहीं मसाले और तेलिय फैट युक्त भोजन, अधिक मसालेदार खाना, कैफीन युक्त पेय, और अल्कोहल का सेवन कम करना चाहिए क्योंकि ये बवासीर के लक्षणों को बढ़ा सकते हैं। इन दवाओं का चयन रोगी के लक्षणों और समग्र स्वास्थ्य के आधार पर किया जाता है। https://shreerkhomoeopathyhospital.in/blog डॉ. रजनीश जैन के अनुसार बवासीर के लिए सर्वोत्तम होम्योपैथी उपचार
बवासीर, जिसे पाइल्स भी कहा जाता है, गुदा और मलाशय के निचले हिस्से में सूजन और तनाव की स्थिति है।
बवासीर क्या और क्यों होता हे ? कारण
बवासीर के प्रकार हैं:
अंदरुनी बवासीर (Internal hemorrhoids) ये मलाशय के अंदर विकसित होते हैं और अक्सर दिखाई नहीं देते। मुख्य लक्षण
बवासीर में खान-पान का भी बहुत महत्व है।
सेवन करना चाहिए
सेवन कम करना चाहिए
बवासीर के होम्योपैथिक प्रबंधन में व्यक्तिगत लक्षणों के आधार पर उपचार किया जाता है।
सल्फर, सेपिया, पल्सेटिला, फॉस्फोरस, नक्स वोमिका, नाइट्रिक एसिड, रेटेनहिया, काली मर, इग्नेशिया, हैमेमेलिस,
आर्सेनिकम एल्बम, अमोनियम कार्ब, एलो सोकोट्रिना, एस्कुलस हिप्पोकैस्टेनम, म्युरिएटिक एसिड, कोलिंसोनिया,
मेलीफोलियम आदि।